ग्वालियर।
केन्द्रीय मंत्री व सांसदों की सिफारिश से झांसी मंडल को करीब 300 स्टॉपेज मिले हैं। यहां ट्रेनें रुकने से यात्रियों को तो सहूलियत भी मिलने लगी है। अब इन स्टॉपेज की समीक्षा का दौर झांसी में शुरू हो चुका है। इसमें सभी स्टेशनों से रिजर्वेशन का पूरा डेटा मंगाया गया है। जिसमें यह देखा जा रहा है कि स्टॉपेज से रेलवे को नफा हुआ या नुकसान। इसके आधार पर ही स्टॉपेज बहाल रखने या न रखने को लेकर रेलवे बोर्ड निर्णय लेगा।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर बीते एक साल में बैंगलुरू राजधानी, कर्नाटक संपर्क क्रांति, दुर्ग जम्मूतवी सहित कुछ अन्य ट्रेनों का स्टॉपेज मिला है। स्टेशन बड़ा है, इसलिए यहां पर ट्रेनों को पर्याप्त यात्री भी मिल रहे हैं। गौरतलब है कि ग्वालियर रेलवे स्टेशन से एवरेज प्रतिदिन 56 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है। जबकि 170 के करीब ट्रेन यहां से गुजरती हैं। कुल मिलाकर ग्वालियर में ट्रेनों का स्टॉपेज छीनने का खतरा कम है। मगर डबरा, मुरैना, दतिया जैसे छोटे स्टेशनों पर खतरा बरकरार है। यहां पर केन्द्रीय मंत्री या सांसदों की डिमांड पर ट्रेनों के स्टॉपेज दे दिए गए हैं। मगर ट्रेनों को यात्री मिल रहे हैं या नहीं इसका आंकलन किया जाना है। क्योंकि ट्रेन का स्टॉपेज देने के बाद यदि रेलवे को पर्याप्त राजस्व नहीं मिलता है तो ऐसे में स्टॉपेज खत्म करने का भी निर्णय लिया जा सकता है।
कमेटी ने मंगाया पूरा रिकॉर्ड
झांसी मंडल में कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी ने स्टेशनों पर ट्रेनों के स्टॉपेज का पूरा रिकॉर्ड झांसी में मंगा लिया है। 6 दिन तक समीक्षा का दौर चलेगा। 6 दिन तक समीक्षा का दौर चलेगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्टॉपेज जारी रखने या खत्म करने का निर्णय रेलवे बोर्ड द्वारा लिया जाएगा
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