ग्वालियर- उ प्र कानपुर के पास 14 फरवरी 1981 को बेहमई कांड हुआ था। तब फूलन और उसके 35 साथियों ने 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस बहुचर्चित हत्याकांड के 39 साल बाद अदालत का फैसला 6 जनवरी को आने जा रहा है। बेहमई कांड ने फूलन को बैंडिट क्वीन बनाया। फूलन के पिता की 40 बीघा जमीन पर चाचा ने कब्जा किया था। 11 साल की उम्र में फूलन ने चाचा से जमीन मांगी। इस पर चाचा ने फूलन पर डकैती का केस दर्ज करा दिया। फूलन को जेल हुई। वह जेल से छूटी तो डकैतों के संपर्क में आई। दूसरी गैंग के लोगों ने फूलन का गैंगरेप किया। इसका बदला लेने के लिए फूलन ने बेहमई के 20 लोगों को गोलियों से भून दिया था। इसी घटना के बाद फूलन देवी बैंडिट क्वीन कहलाने लगी।
बैंडिट क्वीन फूलन देवी को सरेंडर के लिए उस समय भिंड के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी ने तैयार किया था, लेकिन फूलन के साथ एमपी में ऐसी घटना हो गई, जिससे वह फिर से बीहड़ में कूदने को तैयार हो गई। इसके बाद तो एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने तुरंत अपने बेटे को फूलन देवी को बतौर जमानत दिया और कहा यकीन करो तो सरेंडर कर दो। इस घटना के कई महीने बाद फूलन ने भिंड में आकर सरेंडर किया।
फूलन ने किया था सरेंडर से इनकार
फूलन ने 13 फरवरी 1983 को भिंड में सरेंडर किया था। लेकिन इस सरेंडर के लिए फूलन 1982 के अक्टूबर महीने में ही तैयार हो चुकी थी।
उस समय भिंड के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी थे। फूलन अक्टूबर 1982 को भिंड के ऊमरी गांव के पास आ गई। ऊमरी में भिंड पुलिस ने एक शांति कैंप तैयार किया था। इस कैंप में उन डकैतों को रखा जाता था, जो सरेंडर करते थे।
इस घटना से फूलन का मन बदला
फूलन के साथ उसका विश्वासपात्र साथी मुस्तकीम का भाई मुस्लिम था। डकैत मुस्लिम पर उस समय 10 हजार रुपए का इनाम था।
फूलन के सरेंडर के समय चंबल रेंज के डीआईजी एमडी शर्मा थे। एमडी शर्मा डकैतों के सरेंडर के खिलाफ थे। उन्होंने अपना एक मुखबिर ऊमरी थाने में भेजकर डकैतों की जानकारी ली। उन्होंने डकैत मुस्लिम का एनकाउंटर करा दिया। मुस्लिम मरा नहीं, लेकिन उसे गोली लग गई। यह घटना सामने आते ही फूलन देवी भड़क गई और उसने सरेंडर करने से इनकार कर दिया।
फूलन को लगा कि वह भी एनकाउंटर में मार दी जाएगी। फूलन के इनकार से भिंड एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी परेशान हो गए।
दोबारा ऐसे सरेंडर के लिए तैयार किया
सबसे पहले तो भिंड एसपी चतुर्वेदी ने सीएम अर्जुन सिंह से कहकर भिंड रेंज के डीआईजी शर्मा को चंबल रेंज से हटवा दिया और फूलन को मनाने में जुट गए।
फूलन नहीं मानी और वापस चंबल के बीहड़ में लौटने की बात करने लगी। एसपी चतुर्वेदी ने बहुत मिन्नतें की, लेकिन वह तैयार नहीं हुई, क्योंकि उसे अपने एनकाउंटर का डर लगने लगा।
एसपी चतुर्वेदी ने अपना बेटा बतौर जमानत के तौर पर फूलन को दिया। इससे भी फूलन के तेवर ठंडे नहीं हुए।
पांच महीने लेट किया सरेंडर
बैंडिट क्वीन फूलन ने अक्टूबर 1982 की बजाय पांच महीने बाद 13 फरवरी 1983 को भिंड के एमजेएस कॉलेज में अपने साथियों के साथ समर्पण किया।
सरेंडर के लिए उसके सामने स्वयं मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह आए और सरेंडर के बाद वह एमपी की ही जेल में रही।
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