ग्वालियर-निकटवर्ती
लहार स्थित रावतपुरा धाम में चल रही श्री राम कथा में राष्ट्र संत मुरारी बापू ने सोमवार को राम चरित्र की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इंद्रियों को वश में कर चरित्र को संभालकर रखता है वह ईश्वर तुल्य होता है। चरित्रवान व्यक्ति कभी भी अपने शब्दों तक से किसी के चरित्र का हनन नहीं करता। यदि कोई किसी स्त्री के चरित्र का हनन करे तो यह उसके खानदान के बारे में ही दर्शाता है। किसी स्त्री के चरित्र का हनन करने वाला व्यक्ति किसी नीच कुल में ही जन्म लेता है।
संतश्री ने कहा कि भगवान राम से हमें सहनशीलता, त्याग, चरित्रवान, गुरु भक्ति, माता-पिता की सेवा के गुण सीखना चाहिए। विषम परिस्थतियों में भी प्रभु श्री राम कभी विचलित नहीं हुए। वे हमेशा एक ही भाव से रहे। जिसका चरित्र अच्छा होगा तो उसे जग में निरंतर सफलताएं मिलेंगी। हनुमान जी का चरित्र भी बहुत ही उत्तम है। युद्ध के दौरान रावण ने राक्षसों से कहा था कि सबकी निंदा कर लेना, लेकिन हनुमान जी की निंदा भूलकर भी न करना। ना ही कोई उनसे लड़ना। बापू ने कहा कि चरित्रवान का दूसरा गुण बलवान होता है। चरित्रवान में बहुत बल होता है।
बापू ने कहा कि महाबली हनुमान जी का जन्म हर युग में हुआ है। सतयुग में वो भगवान शिव के रूप में है। त्रेतायुग में हनुमान जी के रूप में हैं। द्वापर में भीमसेन के रूप में हैं और कलयुग में राम नाम का सत्संग ही हनुमान जी का रूप है। सरलता जितनी कठिन है उतनी कठिन दुनिया में कोई चीज नहीं है। सरलता पानी है तो राम नाम जपते रहो। जब तक शरीर में प्राण हैं राम नाम जपते रहो। ऊं नमः शिवाय कथा का सार रामनाम है। राम नाम अति पावन है। जब हम बार-बार राम कथा सुनेंगे तो हमारा जीवन सार्थक हो जाएगा। जीवन में व्यसनों से दूर रहना चाहिए। राम नाम का प्रभाव अमिट है। राम नाम कोई सामान्य नहीं है।हमेशा राम नाम के अमृत का सेवन करते रहोगे तो हर व्यसन से दूर हो जाअोगे।
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