ग्वालियर-भोपाल मप्र की कमलनाथ सरकार मध्य प्रदेश के गांवों में आबादी भूमि का सर्वे कराएगी। इसके जरिए गांव में रहने वाले एक-एक व्यक्ति के आवास का रिकॉर्ड बनेगा। सीमांकन होगा और बाकायदा रिकॉर्ड में भूमि स्वामी अधिकार का उल्लेख भी होगा। साथ ही गांव की गली और रास्तों को लेकर जो विवाद होते हैं, उनका निराकरण भी नक्शे के आधार पर होगा।
नक्शे तैयार करने से पहले दावे-आपत्तियां बुलाई जाएंगी। भू-राजस्व संहिता में संशोधन के बाद पहली बार गांवों की आबादी भूमि का नक्शा तैयार कराया जाएगा। इसके लिए राजस्व विभाग मैदानी काम शुरू करने से पहले सभी संभावितों पहलुओं और प्रक्रियाओं का अध्ययन करने में जुटा है।
अभी रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के गांवों के नक्शे तो हैं, लेकिन आबादी के हिसाब से रिकॉर्ड नहीं है। गांव में रहने वाले व्यक्तियों को निर्मित आवास का भूमि स्वामी अधिकार तो है पर राजस्व रिकॉर्ड में व्यक्तिगत उल्लेख नहीं है। इसकी वजह से जमीन को लेकर बार-बार विवाद होते हैं। इनका निराकरण आपसी सहमति के आधार पर तो हो जाता है, लेकिन आबादी भूमि के आधार पर नक्शे नहीं होने से समस्या आती है। इसी तरह गली, सड़क और रास्तों को लेकर विवाद बनता है। अतिक्रमण की शिकायतें भी आम हैं।
शिवराज सरकार ने किया था संहिता में संशोधन
विवादों व शिकायतों को देखते हुए पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने भू-राजस्व संहिता में संशोधन करके गांव में आबादी भूमि का सर्वे कराकर नक्शे तैयार करने का प्रावधान किया था। इसके मद्देनजर राजस्व विभाग ने अब तैयारी शुरू कर दी है।
रिकॉर्ड नहीं होने से नहीं मिलता है ऋण
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आबादी भूमि का सर्वे होने के बाद खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता आएगी। नए सिरे से नक्शे बनाए जाएंगे और सीमांकन होगा। अभी गांवों में बरसों से रह रहे लोगों के पास भूमि स्वामी संबंधी कोई दस्तावेज नहीं हैं। इसकी वजह से उन्हें जमीन के आधार पर बैंक से ऋण भी नहीं मिल पाता है। नक्शे स्पष्ट नहीं होने से न तो गांव की गलियों का पता है और न ही रास्तों का। इसकी वजह से जब भी अतिक्रमण के मामले सामने आते हैं तो आपसी सहमति से विवाद हल करवाने पड़ते हैं। नक्शे बनने के बाद एक-एक चीज स्पष्ट और रिकॉर्ड में होगी।
सर्वे का काम आसान नहीं
हालांकि सर्वे का काम आसान नहीं है। इसमें काफी वक्त और मानव संसाधन लगेगा। प्रारंभिक प्रकाशन करने के बाद दावे-आपत्ति बुलाकर निराकरण करना होगा। यही वजह है कि सर्वे की शुरुआत से पहले इससे जुड़े हर एक बिंदु पर एक-एक चीज का आकलन कुछ जिलों से किया जाएगा।
राजस्व का अब तक सबसे बड़ा कदम
सूत्रों का कहना है कि आबादी भूमि का सर्वे राजस्व महकमे का अब तक का सबसे बड़ा कदम होगा। इसके जरिए गांव की एक-एक इंच भूमि का रिकॉर्ड तैयार होगा। साथ ही सरकार को यह भी पता लगेगा कि कहां-कितनी भूमि किस प्रयोजन के उपयोग में आ रही है। इसके पहले पूर्व मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने राजस्व विभाग पर फोकस करते हुए अविवादित नामांतरण, सीमांकन और लंबित मामलों के निराकरण की विशेष मुहिम चलाई थी।
पिछली सरकार में दिए गए थे भू-अधिकार पत्र
शिवराज सरकार ने जब गांव और शहरों में आवासीय भूमि देने की घोषणा की थी, तब भूमि स्वामी अधिकार नहीं होने की बात सामने आई थी। अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में भू-अधिकार पत्र देने की व्यवस्था बनाई थी। इसके पीछे एक मकसद यह भी था कि बैंकों से मुख्यमंत्री आवास कार्यक्रम के लिए कर्ज दिलाया जा सके। बताया जा रहा है कि बैंकों की ओर से कोई ऐसा दस्तावेज मांगा गया था, जिससे यह साबित हो जाए कि जिस व्यक्ति को कर्ज दिया जा रहा है वो उस भूमि को धारित करने का अधिकार रखता है।
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