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92 साल की मां,40 साल की बेटी,दुखड़ा सुन तहसीलदार-डब्ल्यूडीईओ,सबके दिल पसीज गए

ग्वालियर-
92 साल की मां अपनी 40 साल की बेटी को कलेक्ट्रेट इसलिए लेकर आई थी जिससे कलेक्टर के माध्यम से बेटी को मानसिक आरोग्यशाला में भिजवा सके। पति 12 साल पहले नहीं रहे,बेटा डेढ़ माह पहले दुनिया छोड़ गया। जो बेटी साथ आई उसके पति भी नहीं रहे और दूसरी बेटी का पति साथ नहीं रहने देता। 90 साल की उम्र और बीमार वृद्वा कैसे अस्वस्थ्य बेटी का ख्याल रखे तो मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराने की गुहार लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गईं जिससे वहां मानसिक-शारीरिक देखभाल होती रहे। कलेक्ट्रेट में मां-बेटी कुछ समय के लिए अलग हो गए तो तहसीलदार शिवानी पांडेय ने खुद सहारा लेकर मां तक पहुंचाया। इसके बाद एडीएम टीएन सिंह और जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी शालीन शर्मा को वाकया बताया। अधिकारियों ने एनजीओ के माध्यम से दोनों को भिजवाया और इलाज देखरेख की व्यवस्था का इंतजाम किया।

मैं यहीं आत्मदाह कर लूंगी,बेटी को बेहाल देख दुखी हूं

92 साल की हेमलता शर्मा ने बताया कि वे 12वीं तक पढ़ीं हैं। जिस बेटी की मानसिक-शारीरिक हालत ठीक नहीं है वह इतिहास से एमए कर चुकी है और राजस्थान के वनस्थली में जॉब करती थी। पांच साल पहले तक सब ठीक था उसके बाद पूरे परिवार पर परेशानियों ने डेरा डाल लिया। भगत सिंह नगर में हेमलता किराए के मकान में रहतीं हैं जो मकान मालिक मानवता के नाते किराया भी नहीं लेता। हेमलता शर्मा ने बताया कि बेटी की ऐसी हालत देख बहुत दुखीं रहतीं हैं,बेटी इलाज-देखरेख के लिए भर्ती हो जाए तो वह अपना ख्याल जैसे तैसे रख लेंगी। गुस्सा होकर हेमलता ने यह भी कहा कि अगर सुनवाई नहीं हुई तो कलेक्टर ऑफिस में आत्मदाह कर लेंगी।

बार बार रोए मां,बेटी बोले-चुप हो जाओ,जिसने देखा देखता रह गया

महिला तहसीलदार शिवानी पांडेय ने हेमलता शर्मा की बेटी को उनतक सहारा देकर पहुंचाया। वह स्टिक से चल पा रहीं थीं इसलिए तहसीलदार अपने साथ साथ लाईं। यहां मां-बेटी की पूरी कहानी तहसीलदार शिवानी पांडेय ने सुनी और हेमलता शर्मा ने रोते हुए तहसीलदार का हाथ पकड़ लिया। मां-बेटी की दुखभरी कहानी सुन अधिकारी से लेकर वहां आने वाले लोग देखते रह गए,वे कह रहे थे कि ऐसी स्थिति किसी के साथ न हो।
वन स्टॉप रखवाया गया है

वृद्व महिला व उनकी बेटी को संस्था के माध्यम से वन स्टॉप सेंटर में रखवाया गया है। सीजेएम कोर्ट में पेश किया जाएगा जिससे बेटी के इलाज को लेकर निर्णय होगा।

शालीन शर्मा,जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी

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