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जीएसटी के नोटिसों पर होगी पहचान संख्या, रुकेगी वसूली और फर्जीवाड़ा

ग्वालियर-

वे ही नोटिसजीएसटी के वैध माने जाएंगे जिन पर एक खास पहचान संख्या अंकित होगी। एकीकृत कर प्रणाली में यह नया नियम लागू कर दिया गया है।
इससे सही व्यापारियों को राहत विभाग द्वारा मिलने की उम्मीद हे
सर्च, समन, निरीक्षण, गिरफ्तारी और पूछताछ के नोटिसों के मामले में 8 नवंबर से इस प्रावधान को लागू कर दिया गया है। जीएसटी के नाम पर धमकाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए यह नया नियम लागू किया गया है। जीएसटी के नोटिस पर यूनिक आइडेंटिटी नंबर को ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकरण की जानकारी दर्ज कर जेनरेट करना होगा। नोटिस के ऊपर यह अंक प्रकाशित होगा। इसे डिपार्टमेंटल आइडेंटिटीफिकेशन नंबर (डीआईएन) कहा जाएगा। यदि इन चार प्रकार के जीएसटी नोटिसों पर नंबर प्रिंट नहीं है तो उसे वैध नहीं माना जाएगा। ऐसे में माना जाएगा कि यह नोटिस विभाग से जारी ही नहीं हुआ है।

ताजा स्थिति में सिर्फ ऐसे मामले में बिना नंबर वाले नोटिस को वैध माना जा सकेगा जो किसी ऐसी विशेष परिस्थिति में जारी हुआ हो जब हाथोहाथ नोटिस देना जरूरी हो। ऐसे में भी नोटिस पर इस बात का लिखित में उल्लेख करना होगा कि नोटिस पर डीआईएन किन कारणों से प्रकाशित नहीं किया गया है। अगले 15 दिनों में इस नोटिस के लिए उच्चाधिकारी से अनुमति लेकर डीआईएन जारी करना होगा।

करदाता जान सकेगा वैधता

करदाताओं के लिए भी यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी करदाता सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन डीआईएन के जरिए अपने नोटिस की वैधता जांच सकेगा। पोर्टल से यह जानकारी भी मिल जाएगी कि किस दफ्तर से यह नोटिस जारी हुआ है।

फर्जी नोटिस से धमकाते थे व्यापारियों को

सीए के मुताबिक, अब तक आयकर विभाग के नोटिसों पर इस तरह का एक नंबर होता ही है। सीए सर्टिफिकेट पर भी बीते वर्षों से ऐसे ही एक ऑनलाइन पहचान संख्या दर्ज करने का नियम लागू है। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि किसी तरह के फर्जी हस्ताक्षर, सील आदि से कोई अवैधानिक काम न हो। असल में कई बार फर्जी नोटिस जारी कर करदाता व्यापारी को धमकाया जाता है। वसूली के लिए भी ऐसे नोटिस जारी होते हैं क्योंकि इनका कोई रिकॉर्ड विभाग में नहीं होता, लिहाजा लेन-देन कर ऐसे नोटिसों को फाड़कर खत्म भी कर दिया जाता है। डीआईएन के बाद न तो ऐसे नोटिस जारी हो सकेंगे न किसी नोटिस के जारी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई के बिना उसे खत्म किया जा सकेगा।

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