ग्वालियर-
मुरैना दिवाली के दूसरे दिन यानी पड़वा से मुरैना गांव स्थित प्राचीन दाऊजी मंदिर पर साढ़े तीन दिन तक चलने वाला लीला मेला शुरू होगा। मान्यता है कि 300 साल पुराने इस मंदिर पर भगवान द्वारिकाधीश अपना धाम छोड़कर गांव में मेहमानी करने आते हैं। इस मेला की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों के हजारों लोग इस दौरान मंदिर पर भगवान दाऊजी की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
मुरैना गांव स्थित लीला मेला में बाकायदा भगवान द्वारिकाधीश रथ पर विराजमान होकर निकलते हैं। इस दौरान नागलीला का मंचन भी होता है। गांव के स्वामी परिवार में हर साल जन्मे नवजात शिशु के जरिए यह नाग को नाथा जाता है। साढ़े तीन दिन तक चलने वाले लीला मेला के दौरान जहां धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृ़तिक आयोजन होते हैं। वहीं यहां की घोड़ी रेस पूरे देशभर में विख्यात है, इसमें भाग लेने के लिए दूर-दराज के घुड़सवार यहां अपनी-अपनी घोड़ियों को सजाकर हिस्सा लेने आते हैं। भगवान द्वारिकाधीश का धाम होने की वजह से मुरैना गांव में मोर बहुतायात संख्या में पाई जाती है, जो यहां की पहचान भी है।
कई समाज के सगाई-संबंध होते हैं पक्के
प्राचीन लीला मेला की एक विशेषता यह भी है कि यहां कई समाज के लोग आपस में मिलते-जुलते हैं और दाऊजी मंदिर परिसर में अपने विवाह योग्य बेटे-बेटियों के सगाई-संबंध पक्के करते हैं। लोग सालभर इस मेले का इंतजार करते हैं, ताकि वे भगवान के सामने अपने बच्चों के संबंध पक्के कर सकें
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