ग्वालियर. हाल में आइजी (पुलिस महानिरीक्षक) से एडीजी (अतिरिक्त महानिदेशक) बने राजा बाबू सिंह ने अपराध रोकने के लिए अब युवाओं तक श्रीमद्भागवत पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। वह अभी तक 1108 गीता का वितरण कर चुके हैं। उन्हें नवंबर तक संभाग के हर एक युवा तक गीता पहुंचाकर उसके महत्व से परिचित कराना है। राजा बाबू का मानना है कि मनुष्य अपने अंदर के इमोशन को मैनेज नहीं कर पाता, जिस कारण से वह अपराध करता है। यह संयम हमें गीता सिखाती है। इसलिए इसे हर एक हाथ तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। राजा बाबू ने कहा कि मेरे प्रिय विषय पर्यावरण, गीता और गांधी हैं, जिन पर मैं निरंतर काम करता रहूंगा।
रोजाना पढ़ता हूं भागवत गीता
एडीजी राजा बाबू ने बताया कि भगवत गीता के 18 अध्याय में 700 श्लोक में जीवन का सार बसता है। यह हमें सही दिशा में चलना, नवाचार करना, विसंगतियों से दूर रहना और विषम परिस्थितियों से लडऩा सिखाते हैं। मैं रोजाना सोने से पहले एक से डेढ़ घंटे गीता पढ़ता हूं। अपने जीवनकाल में मैं कई बार गीता पढ़ चुका हूं।
आगे बढऩे की प्रेरणा देती है गीता
इस कैंपेन के अंतर्गत उन्होंने दो माह तक का प्लान तैयार किया है, जिसके अंतर्गत वह कॉलेज, मदरसा, सेंट्रल जेल में लोगों तक गीता बांटने के साथ ही उसके सार से परिचित कराएंगे। इसका शेड्यूल उन्होंने तय कर रखा है। उनका मानना है कि 100 में से यदि 20 लोग भी गीता पढकऱ सही राह पकड़ते हैं, तो यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। गीता सिर्फ भटके हुए लोगों को सही मार्ग ही नहीं सिखाती, बल्कि यह आगे बढऩे की प्रेरणा भी देती है।
हजारों की संख्या में बनवा चुके सीड बॉल्स
पर्यावरण की चिंता करते हुए राजा बाबू ने तीन माह पूर्व हजारों की संख्या में सीड बॉल्स बनवाईं, जिन्हें खाली स्थानों पर फेंका गया।
इस माध्यम से ये पौधे अंकुरित हुए और आज पौधे का रूप ले चुके हैं। उनकी यह प्रेरणा शहर के लिए आदर्श बनी और संस्थाओं व संगठनों ने पौधरोपण का काम शुरू किया।
राजा बाबू ने बताया कि वह गृहों के हिसाब से नव नक्षत्र गृह वाटिका भी तैयार करवा चुके हैं।
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