इंदौर-चर्चित हनी ट्रैप गैंग से नजदीकियां रखने वाले प्रदेश के कई बड़े नेताओं और आईएएस अफसरों की इज्जत इंदौर में हुई एक एफआईआर से बच गई। निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह ने गैंग से परेशान होकर पुलिस को सिर्फ आवेदन देकर अपना पीछा छुड़वाना चाहा था, लेकिन जब गैंग पकड़ाई तो प्रदेश स्तर के नेताओं, अफसरों की कई कहानियां सामने आने लगी। यह गैंग एक साल से एटीएस के राडार पर थी। सबको पता था कि क्या हो रहा है, कैसे हो रहा है, लेकिन फरियादी नहीं मिलने से अफसर बेबस थे।
श्वेता ने कहा- दोनों तरफ के लोग शामिल हैं, पता कर लो कौन है
पुलिस केस को इंजीनियर पर केंद्रित कर बड़ों को शर्मिन्दगी से बचाने की कोशिश में जुटी
मेडिकल जांच कराने हॉस्पिटल पहुंची श्वेता जैन
निगम इंजीनियर के रूप में उन्हें गैंग तक पहुंचने का जरिया मिल गया, पर इस चक्कर में इंदौर, भोपाल के नेता, अफसरों की सांसें ऊपर-नीचे हो रही हैं कि कहीं उनका नाम न खुल जाए या कोई वीडियो सामने न आ जाए। यही वजह है कि गुरुवार को पुलिस जिस तत्परता से जांच, पूछताछ कर रही थी, शुक्रवार को वह थोड़ी धीमी पड़ने लगी। जिस तरह से दबाव बनने लगा है उससे लग रहा है कि मामला सिर्फ हरभजन सिंह पर ही टिक कर रह जाएगा।
बाकी जितनों के नाम, सबूत और वीडियो हैं, वे जांच के नाम पर जब्त कर फॉरेंसिक लैब भेजे जाएंगे।
उसके बाद उनकी जांच होगी या नहीं, यह भी तय नहीं है। सबसे ज्यादा चिंता में वे अफसर और नेता हैं, जिनके इन महिलाओं से संपर्क रहे हैं। वे शुक्रवार को परिचित पुलिस अफसरों के माध्यम से पूछताछ के बिंदु पता करते रहे। ज्यादातर यही दबाव बनाने में जुटे हैं कि अब पुलिस कुछ भी खुलासा नहीं करे। जो पड़ताल है, वह पुलिस थाने के भीतर ही सिमटकर रह जाए।
एटीएस एक साल से पीछा कर रही थी गैंग का : सफेदपोश लोगों के गलियारों की शान बन चुकी हनी ट्रैप गैंग का आतंक इतना बढ़ गया था कि एटीएस एक साल से उनका पीछा कर रही थी। छोटी-बड़ी जानकारियां जुटाई जा रही थी कि किससे मिलती हैं, कहां रहती हैं और कहां जाती हैं। सबकुछ पता होने पर भी सिर्फ फरियादी नहीं मिलने से एटीएस कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। अधिकांश पीड़ित इस गैंग को गिफ्ट, पैसा और टेंडर देकर परेशान थे। इसी दौरान निगम इंजीनियर उलझे तो आठ दिन पहले एसएसपी ऑफिस जाकर पीड़ा बताई। वे भी सिर्फ आवेदन देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने गैंग को ट्रैप किया और फिर एफआईआर भी दर्ज करवा ली।
कोर्ट में पेश करने से पहले : शुक्रवार दोपहर को जब पलासिया पुलिस हनी ट्रैप गैंग की आरोपी श्वेता जैन, बरखा सोनी और श्वेता विजय जैन को मेडिकल के लिए एमवायएच ले गई तो श्वेता जैन बिफर गई और चिल्लाकर बोलने लगी कि हमें फंसाया जा रहा है। आप लोग पता कर लें कि कौन फंसा रहा है। कोई भी सही नहीं है। हनी ट्रैप कांड में पुलिस पर इतना दबाव है कि वह आला अफसरों के संज्ञान में लाए बिना कुछ भी कार्रवाई नहीं कर रही। कुछ अफसरों ने बताया उनके फोन रिकॉर्ड हो रहे हैं। कुछ गड़बड़ हुई तो उनकी नौकरी भी जा सकती है।
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