ग्वालियर-अतिवर्षा के कारण इस वर्ष ग्वालियर-चंबल संभाग में आई बाढ़ से हुए नुकसान का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे और मदद पहुंचाने में देरी की शिकायत के साथ एडवोकेट उमेश बौहरे ने मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में याचिका दायर कर कहा है कि बीते दिनों हुई बारिश के कारण भिंड, मुरैना, श्योपुर समेत दूसरे जिलों में फसल, मकान और लोगों की जान का भारी नुकसान हुआ है। लेकिन केंद्रीय दल ने कोई सर्वे नहीं किया और न बाढ़ प्रभावितों को जरूरी मदद पहुंचाई गई।

चंबल नदी में खतरे का निशान 119 मीटर पर है जबकि पानी 127 मीटर से भी ऊपर जा चुका। यहां आसपास के क्षेत्र में एक मंजिला मकान तक डूब गए और 100 से ज्यादा गांव पानी से घिरे हुए हैं। इस बाढ़ से मुरैना में 4 लोगों की मौत भी हो चुकी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 100 फीसदी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
इन हालातों को लेकर भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मप्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मुख्य सचिव मप्र शासन, मप्र कृषि विभाग के प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव, ग्वालियर संभाग और चंबल संभाग के आयुक्त, ग्वालियर समेत भिंड, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, दतिया और विदिशा कलेक्टर को पत्र भेजा गया था। लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन द्वारा तत्काल 1 हजार करोड़ रुपए की मदद जारी करनी चाहिए। ताकि, बाढ़ प्रभावित लोगों के रहने, खाने आदि की व्यवस्थाएं हो सकें। जिन लोगों की मौत बाढ़ से हो गई है उनके परिवार को प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए और सामान व मकान के नुकसान वाले परिवार को 50-50 हजार रुपए दिए जाएं। याचिका में आग्रह किया गया है कि हाईकोर्ट से रिटायर जज की अध्यक्षता में समिति बनाकर आकंलन समिति बने और सहायता वितरित की जाए, जिससे पीड़ितों की समय पर सहायता की जा सके
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