बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढ़न स्वर सम्राट मोहम्मद रफी साहब की पुण्यतिथि के अवसर कल बुधवार 31 जुलाई 2019 को शाम 06:00 से रात 10:00 बजे एक सांस्कृति कार्यक्रम *”एक शाम रफी साहब के नाम”* का आयोजन सामुदायकि भवन (जिला अस्पताल के सामने) बैढन में किया जा रहा है ।

सिंगरौली से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र कालचिन्तन के आयोजकत्व में आयोजित उक्त कार्यक्रम बैढन स्थित सामुदायिक भवन में शाम 06:00 बजे से प्रारंभ होगा उक्त कार्यक्रम में देशभर के जाने माने कलाकारों द्वारा अपनी प्रस्तुतियां दी जायेंगी व जबलपुर से सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका – मोहिनी द्विवेदी, जबलपुर से नीरज शुक्ला, और झारखण्ड के प्रसिद्ध ब्लेबैक सिंगर – अली राजा सहित दर्जनों कलाकार शिरकत करेंगे ।
हिंदी सिनेमा के श्रेष्ठतम पार्श्व गायकों में से एक मोहम्मद रफी को आज दुनिया रफी साहब के नाम से जानती हैं और आज रफी साहब हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके गाये हुये नगमें हमारे दिलों में उनकी मौजूदगी का एहसास कराती हैं और 31 जुलाई के दिन इस महान गायक ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहा था। रफी साहब अपनी मधुरता की वजह से समकालीन गायकों के बीच अपनी अलग पहचान बनायी है ।
31 जुलाई साल 1980 को मोहम्मद रफी साहब ने अपनी आखिरी सांस ली थी और मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर साल 1924 को हुआ था रफी अपने माता पिता की छह संतानों में से दूसरे नंबर पर थे और रफी को गाने की ललक तब लगी जब उन्होंने गली में एक फकीर को गाते हुए सुना था तभी से उनहोंने गाना शुरू किया बड़े भाई ने उनकी कला को पहचाना। तब उन्होंने परिवार को मनाया कि उन्हें बंबई जाने दें रफी ने उस्ताद अब्दुल वहीद खांन – पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत सीखा महज 13 साल की उम्र में तब उन्होंने सरेआम लोगों के सामने गाया तब उन्होंने केएल सहगल के गाने गाये थे। इसके बाद से रफी साहब ने कई नगमें गाये जो आज भी संगीत प्रेमी बड़े ही चाव से सुनते हैं यहां तक की कई युवा भी उनके हर एक नगमे के दीवाने है और रफी साहब की याद में जिले में ऐसा आयोजन पहली बार हो रहा है।
*आयोजकों द्वारा स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने का मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजकों द्वारा स्थानीय जनता से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर शिरकत करने की अपील भी की गयी है।*
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