ग्वालियर-
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 24 घंटे बिजली देने के दावे झूठे निकले हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों की आपूर्ति का एमडास (मीटर एक्यूजन डाटा सिस्टम) से तैयार की गई रिपोर्ट में अधिकारियों का झूठ सामने आया है। न आंधी आई और न तेज हवा चली फिर भी 24 घंटे आपूर्ति वाले फीडरों पर 3 से 4 घंटे की कटौती हुई है। गांव के मिक्स फीडरों पर 10 घंटे से भी कम बिजली मिल रही है। 16 से 22 अप्रैल के बीच जिले में काफी कटौती हुई है। संभागीय व जिला मुख्यालय, तहसील व गांव में निर्धारित घंटे बिजली नहीं मिल रही है। वहीं दूसरी ओर मुरैना सर्कल के महाप्रबंधक ने कटौती की गाज से बचने के लिए अपनी रिपोर्ट दी है कि एक साथ सभी को बिजली दे दी तो ब्लैक आउट हो जाएगा, क्योंकि गर्मी की वजह से पावर ट्रांसफार्मर ओवर लोड हैं।

प्रदेश में हो रही बिजली कटौती को सरकार ने संज्ञान में ले लिया है। अपर मुख्य सचिव प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बिजली आपूर्ति की समीक्षा कर रहे हैं। ग्वालियर चंबल संभाग के आबादी, मिक्स व कृषि फीडरों पर 16 से 22 अप्रैल तक की गई बिजली आपूर्ति की रिपोर्ट तैयार की गई। 1788 आबादी वाले फीडर व 1215 कृषि व मिक्स फीडरों की रिपोर्ट तैयार की गई। एमडास से यह जानकारी निकाली गई तो हर फीडर पर 3 से 4 घंटे की कटौती हुई है। मिक्स फीडर पर 10 घंटे से ज्यादा आपूर्ति नहीं है। दोनों संभाग में कृषि के 25 फीसदी फीडर ऐसे हैं जिनको सिर्फ 0 से 4 घंटे ही बिजली मिल सकी है। गर्मियों का वक्त है। पानी के लिए बिजली की जरूरत है। मुरैना महाप्रबंधक ने 23 अप्रैल को पत्र लिखकर प्रबंधन को अवगत कराया है कि शहर में स्थापित 11 नंबर ट्रांसफार्मर पर लोड अधिक है। इस वजह से एक-एक फीडरों को बंद करना पड़ता है। सभी लोगों को एक साथ बिजली नहीं दी जा सकती है। सुधार कार्य के लिए 3 करोड़ 72 लाख रुपए के फंड की जरूरत है। तभी बिजली मिल सकेगी।
क्या है एमडास
– सब स्टेशनों से निकलने वाले 11 केवी फीडरों पर इनर्जी मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों की रीडिंग का ठेका ईमीटैक कंपनी को दिया गया है। इस को एमडास नाम दिया गया है। फीडर पर लगाए गए इनर्जी मीटरों के माध्यम से पता चल जाता है कि फीडर से कितनी बिजली आपूर्ति की गई और क्या लोड रहा है।
– एमआरआई के माध्यम से अधिकारी बिजली आपूर्ति का समय बता रहे थे। यह रिपोर्ट हाथों से तैयार की जाती थी। इसमें अधिकारी पूरी सच्चाई छिपा लेते थे। जैसे कि किसी फीडर पर 50 ट्रांसफार्मर लगे हैं और शुरुआत के 2 ट्रांसफार्मर तक आपूर्ति करते थे। पीछे के ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति बंद रखते थे। ग्वालियर जिले में इस तरह के मामले पकड़े गए। उसके बाद एमडास से मॉनीटरिंग शुरू की गई।
ऐसे दी जानी है बिजली
– संभागीय मुख्यालय पर 24 घंटे आपूर्ति देनी है। ग्वालियर शहर व मुरैना शहर संभागीय मुख्यालय हैं। ट्रिपिंग व फॉल्ट की वजह से 24 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है।
– जिला मुख्यालय पर 23 घंटे आपूर्ति की जानी चाहिए, लेकिन यहां भी बिजली 21 से 22 घंटे मिल रही है।
– तहसील स्तर पर 22 घंटे बिजली मिलनी चाहिए, लेकिन फीडरों पर कटौती होने से आपूर्ति का समय 20 घंटे से नीचे हो रहा है।
– गांव व अन्य जगह पर 20 घंटे आपूर्ति होनी चाहिए। यहां 15 से 16 घंटे आपूर्ति हो रही है।
चार तरह से विभाजित हैं फीडर
– आबादी फीडरः इन फीडरों से सिर्फ रिहायसी इलाके तक बिजली पहुंचाई जाती है।
– कृषि फीडरः इस फीडर से कृषि पंपों को बिजली आपूर्ति की जाती है। थ्री फेस में 10 घंटे बिजली आपूर्ति का समय निर्धारित किया गया है।
– मिक्स फीडरः ऐसे फीडर जो फीडर सेपरेशन में छूट गए। आबादी व कृषि की लाइन अलग-अलग नहीं हो सकी हैं। इस फीडर पर थ्री फेस में 10 घंटे बिजली। उसके बाद सिंगल फेस में 12 घंटे बिजली देनी है।
– औद्योगिक फीडरः इस फीडर पर सिर्फ उद्योगों को बिजली दी जाती है।
आपूर्ति में सुधार
– बिजली आपूर्ति में सुधार हो गया है। बिजली को लेकर कहीं से शिकायत नहीं आई है। आपके पास जो डाटा है, उसके संबंध में कुछ ज्यादा नहीं कह सकता हूं।
डीपी अहिरवार, मुख्य महाप्रबंधक ग्वालियर रीजन
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal