ग्वालियर-
दहेज प्रताड़ना के मामले में अपर सत्र न्यायालय नेपति को 10 साल की सजासुनाते हुए कहा कि अपराध गंभीर प्रवृत्ति का है। समाज में दहेज प्रथा विकराल रूप लेती जा रही है। दहेज न मिलने पर लोभियों द्वारा महिला की हत्या कर दी जाती है या फिर उसे इतना प्रताड़ित कर दिया जाता है, जिससे उसे आत्महत्या करनी पड़ती है। ऐसे मामलों में सहानभूति पर विचार न करते हुए दंड दिया जाना उचित होगा। इसका प्रभाव समाज में अच्छा पड़ेगा।

जिला मुरैना ग्राम करैनी निवासी सुनील त्यागी का विवाह 29 अप्रैल 2013 को चायना के साथ हुआ था। सुनील ग्वालियर में कोचिंग पढ़ाता था और वह कांटे साहब के बाड़े में किराए के मकान में रहता था। शादी के बाद अपनी पत्नी चायना को ग्वालियर लेकर आ गया। उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। इसको लेकर काफी विवाद हुआ। चायना के माता-पिता घर आए और दोनों को समझाया। फिर कुछ दिन प्रताड़ित नहीं किया। फिर से प्रताड़ित करने पर 24 अगस्त 2016 को चायना ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। चायना के मायके पक्ष ने बहोड़ापुर थाने में सूचना दी। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। चायना का अंतिम संस्कार उसके ससुराल में किया गया। मृतका के परिवार वालों ने पति, सास-ससुर, देवर, ननद पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया। पुलिस ने दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर पति व अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक बीडी माहौर ने तर्क दिया कि अपराध गंभीर प्रवृत्ति का है। आरोपियों ने दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित किया, जिससे उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा। दहेज हत्या को लेकर समाज में कड़ा संदेश देने की जरूरत है। आरोपी सुनील त्यागी ने बचाव में कहा कि उसका पूर्व से कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। चायना को प्रताड़ित नहीं किया गया है। सजा देने में दया का भाव दिखाया जाए। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सुनील को 10 साल की सजा सुनाई और शेष आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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