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सेंवढ़ा कृषि उपज मंडी-भावांतर में हुआ था लाखों का भृष्टाचार, तीन बार हुई जांच, अब गायब हुए कागज

ग्वालियर-

सेंवढ़ा कृषि उपज मंडी सेंवढ़ा में वर्ष 2017 में भावांतर भुगतान योजना के तहत लाखों के भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस मामले में तत्कालीन मंडी सचिव केके शर्मा व उनके सहयोगी कुछ कर्मचारियों पर फर्जी रसीद काटने का आरोप लगा था। मामले में अब तक दो बार जांच हो चुकी है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। बुधवार को मामला फिर गरमा गया, क्योंकि इस बार जांच के लिए मंडी बोर्ड भोपाल के अपर संचालक एचडी वर्मा व मंडी बोर्ड ग्वालियर के संयुक्त संचालक आरपी चक्रवर्ती की दो सदस्यीय जांच कमेटी सेंवढ़ा पहुंची। दिनभर अधिकारी मंडी कार्यालय में जमे रहे पर उन्हें भावांतर से जुड़ा रिकार्ड तक नहीं मिला। अधिकारी दो दिन की मोहलत देकर बैरंग लौट गए। बतादें, कि इस पूरे मामले में बड़ी कार्रवाई की आहाट होने लगी है।
 
शासन द्वारा उड़द की बिक्री मंडी क्षेत्र में करने वाले किसानों को समर्थन मूल्य एवं मंडी में हुई खरीद में मिले मूल्य के बीच के अंतर का भुगतान करने का निर्णय 2017 में लिया था। उस वक्त मंडी में उड़द की कीमत 3 हजार रुपए क्विंटल था, जबकि समर्थन मूल्य 5400 रुपए प्रति क्विंटल था। इस प्रकार प्रति क्विंटल 2400 रुपए तक किसान के खाते में डाले गए। इस पूरे मामले में शासन ने दी जाने वाली भावांतर की राशि जो कि हजारों में थी को खुर्दबुर्द करने के लिए एक गिरोहबंद तरीके से काम हुआ। इस मामले की दर्जनों शिकायतें हुईं। शिकायतों की जांच सेंवढ़ा एसडीएम से लेकर मंडी बोर्ड ग्वालियर के संयुक्त संचालक तक ने की। तत्कालीन सेंवढ़ा एसडीएम अशोक सिंह चौहान ने 12 जुलाई 2018 को जारी आदेश में स्पष्ट किया, कि मंडी सचिव केके शर्मा व मंडी उपनिरीक्षक विक्रम जाटव प्रथम दोषी साबित हुए हैं। उन्होंने दोनों अधिकारियों को जांच प्रभावित करने तथा दस्तावेज छिपाने का दोषी मानते हुए तत्काल हटाने की अनुशंसा की। एक और जांच 27 अक्टूबर 2018 को मंडी बोर्ड के संयुक्त संचालक आरपी चक्रव्रती द्वारा की गई। संयुक्त संचालक ने भी अपने आदेश में उल्लेख किया, कि मंडी सचिव श्री शर्मा ने जांच के दौरान दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। उन्होंने जांच अधिकारी को गुमाराह करने का प्रयास किया। जांच अधिकारी ने मंडी शुल्क की चोरी व अनियमितता होने की रिपोर्ट पेश की। इन आदेशों के बाद तत्कालीन मंडी सचिव केके शर्मा को सेंवढ़ा से हटा दिया गया। भावांतर योजना में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद विभाग ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद शशिभान बैस ने हाल ही में राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक को शिकायत की। 11 मार्च 2019 को हुई इस शिकायत में दोषी अधिकारियों पर आरोप सिद्ध होने के बाद भी वरिष्ठ कार्यालय द्वारा उन्हें बचाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद भोपाल से ही दो सदस्यीय टीम गठित हुई। इसमें मंडी बोर्ड भोपाल के अपर संचालक एचडी वर्मा तथा मंडी बोर्ड ग्वालियर के संयुक्त संचालक आरपी चक्रव्रती को जांच के लिए अधिकृत किया।
 
इस प्रकार किया भ्रष्टाचार
 
1. इस पूरे मामले में शिकायत कर्ता शिवभान सिंह राठौर, लाखन सिंह चौहान, राजकुमार, रामजी गुर्जर आदि द्वारा शिकायत की गई। इसमें उल्लेख किया गया, कि मंडी के कर्मचारियों ने मंडी में माल आए बगैर एवं उसकी बिक्री के बगैर ही फर्जी बिक्री दिखाने में व्यापारियों से मिलकर गलत दस्तावेज बनाए। बिक्री को प्रमाणित करने वाली 37/2 की पर्ची काटी। चुंकि न तो माल आया और नहीं बिका। ऐसे में यह सब केवल भावांतर राशि को हड़पने के लिए किया गया। इस पूरे मामले में व्यापारी किसान के साथ मंडी के अधिकारी कर्मचारी शामिल रहे।
 
2. हेतमपुरा निवासी लाखन सिंह चौहान ने अपने मंडी बोर्ड के संयुक्त संचालक को दिए बयान में यह स्पष्ट किया कि उनके पंजीयन के लिए मंडी सचिव एवं उपनिरीक्षक ने 20 हजार रुपए लिए। उसे कहा गया, कि तुम्हें लाखों का भावांतर मिलेगा तो इतना पैसा तो देना ही पड़ेगा। लाखन सिंह के अलावा अनेक किसानों ने इस तरह की शिकायतें की थी।
 
3. उड़द की खरीद व बिक्री के नाम पर भावांतर की राशि को हड़पने की योजना पर कार्य हुआ उसका न तो व्यापारी ने कोई स्टांक मेंनटेन किया और नहीं उस उड़द की खरीद पर व्यापारी ने किसी तरह का भुगतान अपनी केशबुक एवं चुकता में दिखाया। इससे यह साबित हुआ, कि पूरा काम बगैर रिकार्ड के है।
 
4. उड़द के भावांतर बावत एक हजार से अधिक किसानों ने लाखों रुपए की भावांतर राशि अपने खातों में ले ली।
 
5. सेंथरी के व्यापारी निर्मल खरे के लाइसेंस पर 800 क्विंटल की उड़द की खरीद दिखाई गई, जबकि खुद व्यापारी को इसका पता नहीं था। जांच में यह भी साबित हुआ। इस पूरे मामले में मंडी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए।
 
6. शिकायत कर्ताओं ने यह भी उल्लेख किया, कि पिछले 30 वर्ष मे इतनी उड़द मंडी में नहीं बिकी जितनी एक वर्ष मे बिक गई। इसका रिकार्ड भी मंडी के पास मौजूद है।
 
अधिकारियों को नहीं मिला रिकार्ड
 
दो अधिकारियों के साथ एक दर्जन कर्मचारियों का जांच दल सेंवढ़ा पहुंचा। अधिकारियों ने रिकार्ड मांगा तो वर्तमान सचिव रामकुमार गुप्ता ने कहा, कि पूर्व सचिव ने रिकार्ड जमा ही नहीं किया। तत्कालीन सचिव केके शर्मा को बुलाया गया। उन्होंने कहा, कि मुझे याद नहीं कि रिकार्ड कहां गया जांच से बचने के लिए इस पूरे रिकार्ड को ही गायब किया जा रहा है। सूत्रो की मानें तों मंडी सचिव श्री शर्मा एवं सहायक उपनिरीक्षक सेंवढ़ा रमेश यादव द्वारा यह रिकार्ड मंडी बोर्ड ग्वालियर में ले जाने के लिए सेंवढ़ा से ले जाया गया। मंडी बोर्ड ग्वालियर में लिपिक बीके नरवरिया को दिया गया। बाद में यह रिकार्ड वापस सेंवढ़ा नहीं आया।
 
दो दिन की दी है मोहलत
 
सेंवढ़ा मंडी में भावांतर के दौरान हुई गड़बड़ी की जांच के लिए मैं आया हूं। पूर्व में दो बार जांच हो चुकी है। इस बार अधिकारी रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवा सके। मेरे द्वारा दो दिन का वक्त दिया गया है। मेरी जानकारी के अनुसार पूर्व सचिव श्री शर्मा एक बार रिकार्ड लेकर ग्वालियर आए थे। उस वक्त उनके पास अधूरा रिकार्ड था। जांच अभी जारी रहेगी कर्मचारियों ने रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवाने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
 
आरपी चक्रव्रति संयुक्त संचालक मंडी बोर्ड ग्वालियर।
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