ग्वालियर-पांच हजार के इनामी दस्यु ने वृंदावन और मथुरा में 6 साल तक काटी फरारी13 साल पहले बस लूटने व 19 यात्रियों का अपहरण करने का है आरोप,

ग्वालियरश्योपुरशिवपुरी वर्ष 2007 में चंबल में आतंक का पर्याय रहे रामबाबू गड़रिया गैंग का उसके एनकाउंटर के साथ ही खात्मा हो गया, जबकि गिरोह में उसके साथी पुलिस से बचने इधर-उधर भाग निकले। रामबाबू की गैंग में शामिल और 2006 में रामबाबू के साथ इंदौर जाने वाली बस में लूटपाट और 19 लोगों का अपहरण करने वाला 5 हजार का इनामी दस्यु चिंटू गड़रिया को देहात थाना पुलिस ने बीते रोज साधु के वेश में गिरफ्तार किया है। चिंटू ने वृंदावन और मथुरा में करीब 6 साल तक फरारी काटी। उसने साधुओं के अखाड़े में शामिल होकर वैराग्य अपनाया। फरारी की शुरुआत में चिंटू के साथ रामबाबू गड़रिया की बहन चंदा गड़रिया भी 3 साल तक रही, लेकिन इसके बाद से उसे भी चंदा की कोई जानकारी नहीं है।
श्योपुरएसपी नगेन्द्र सिंह ने इसका खुलासा प्रेस वार्ता में किया। पुलिस कंट्रोल रूम पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडिशनल एसपी पीएस कुर्रे, एसडीओपी आरटी मालवीय, एसडीओपी जीडी शर्मा उपस्थित रहे।
शिवपुरी के नरवर थाना क्षेत्र के बंगला गांव निवासी चिंटू उर्फ चित्ता पुत्र हल्के गड़रिया ने वृंदावन और मथुरा में 6 साल फरारी के बाद शिवपुरी के एक मंदिर में फरारी काटी। यहां वह श्रद्धालुओं का गुरु बन गया और उन्हें ज्ञान की बातें बताने लगा। यहां करीब 5 साल से वह मंदिर पर रहकर लोगों से मिलने वाले दान पर गुजर-बसर कर रहा था। मंगलवार को वह छर्च थाना क्षेत्र के बिलौआ गांव में रिश्तेदारी में जाने के लिए निकला। इस बीच मुखबिर ने चिंटू की सूचना पुलिस को दे दी। पुलिस ने उसे श्योपुर-शिवपुरी हाईवे पर बिलौआ रोड से गिरफ्तार कर लिया।
नाम रखा अयोध्या शरण, रामबाबू की बहन भी साथ रही : चिंटू गड़रिया ने पहले पुलिस को लगातार गुमराह किया। उसने अपने उप्र मथुरा का होने के आईडी पेश किए, लेकिन पुलिस ने उसकी नहीं मानी। चिंटू ने फरारी में अपना नाम अयोध्या शरण पुत्र कुंजबिहारी निवासी मथुरा उप्र रख लिया था। लेकिन मुखबिर की सटीक सूचना पर गिरफ्तार आरोपी चिंटू से जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने सच्चाई कुबूल कर ली। चंदा को भी शरण देने की बात कुबूल की। हालांकि आरोपी अभी भी पुलिस को अन्य साथियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है।
2006 में यात्रियों को लूट कर बस में लगा दी थी आग : वर्ष 2006 में रामबाबू गड़रिया के साथ मिलकर चिंटू गड़रिया ने इंदौर जाने वाली बस में न सिर्फ लूटपाट की थी, बल्कि बस को आग के हवाले भी कर दिया था। उस समय 11 लाख रुपए की लूट हुई थी। गैंग का यह मूवमेंट देख पुलिस ने उस पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था और अप्रैल 2007 में रामबाबू गड़रिया के एनकाउंटर के साथ ही गैंग खत्म हो गया था और गैंग के सदस्य फरार हो गए। जिनमें 5 हजार रुपए का इनामी चिंटू गड़रिया भी शामिल था। श्योपुर एसपी नगेंद्र सिंह ने बताया कि गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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