ग्वालियर-
हाईकोर्ट में शासन का पक्ष रखने के लिए नई सरकार ने गुरुवार को 32 नए वकीलों की एक साल के लिए नियुक्तियां कर दी। इस बार 6 पद खाली छोड़े गए हैं। नई लिस्ट जारी होते ही वकील अपना कार्यभार लेने महाधिवक्ता कार्यालय पहुंच गए। वहीं दूसरी ओर पुराने वकीलों से पुस्तकें व फाइलें जमा करा ली गईं।
भाजपा सरकार ने 31 जुलाई 2017 को हाईकोर्ट में शासन का पक्ष रखने के लिए 38 शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति की थी। वेतन भी सवा लाख रुपए प्रति महीना कर दिया था। इन वकीलों का 31 जुलाई 2018 को कार्यकाल खत्म हो रहा था, लेकिन विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने नई नियुक्ति नहीं की, इनका ही 6 महीने कार्यकाल बढ़ाकर 31 जनवरी कर दिया था। भाजपा सरकार बदलने के बाद अतिरिक्त महाधिक्ता व उप महाधिवक्ता का इस्तीफा ले लिया था। शासकीय अधिवक्ताओं की नई नियुक्ति के लिए वकीलों से आवेदन मंगाने शुरू कर दिए थे। करीब 450 आवेदन जमा हुए। भाजपा समर्थित वकीलों ने अपनी नियुक्ति के लिए काफी जोर लगा दिया था। नई लिस्ट पर संशय बना हुआ था, लेकिन देर शाम नई लिस्ट जारी कर दी गई। 38 में से 32 वकील ही नियुक्त किए गए। 6 पद खाली रह गए। 1 फरवरी से नए वकील कोर्ट में पैरवी के लिए उपस्थित होंगे।
इन्हें बनाया गया शासकीय अधिवक्ता
-राजेन्द्र जैन, मदन मोहन त्रिपाठी, सत्येन्द्र राजपूत, महेन्द्र सिंह रावत, पुरुषोत्तम पांडे, रामकृष्ण उपाध्याय, आनंद भारद्वाज, फैसल अली शाह, सोमनाथ सेठ, प्रतीप कुमार बिसोरिया, राजीव शर्मा, रामकृष्ण सोनी, अनुराधा सिंह, पवन सिंह रघुवंशी, भवर सिंह भदौरिया, आदित्य सिंह घुरैया, वरुण कौशिक, शुशांत तिवारी, सितीज शर्मा, राजकुमार मिश्रा, संजीव कुमार मिश्रा, अंकित सक्सेना, रविन्द्र शर्मा, मुकेश शर्मा, ऋषिकेष दत्त मिश्रा, विक्रांत शर्मा, मनोज द्विवेदी, गायत्री सुर्वे, आलोक शर्मा, संजय बहरानी को शासकीय अधिवक्ता बनाया गया है। रवि शंकर गुप्ता, रविशंकर बंसल को उप शासकीय अधिवक्ता बनाया गया है।
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal