ग्वालियर-
लावारिस व आवारा मिले अपनों से बिछड़े बच्चों को परिजनों से मिलाकर उनके चहरों पर मुस्कान लौटाई गई। आवारा व लावारिस मिले बच्चों का बचपन संवारने का काम चाइल्ड हेल्प लाइन ने किया है। शहर में मिले ऐसे बच्चे जो किसी न किसी कारण से अपनों से बिछड़ चुके थे।उन्हें पुलिस की मदद से खोजा व परिजनों तक पहुंचाया गया है।जिससे उनका बचपन पटरी पर लौट सके।हेल्प लाइन ने पिछले तीन साल में 619 बच्चों के चहरे पर मुस्कान लौटाने का काम किया है। हेल्प लाइन की मदद से अब यह बच्चे अपने माता पिता के साथ हंसी खुशी जीवन गुजार रहे हैं। जिन बच्चों के परिजन नहीं मिल सके उन्हें शैल्टर होम रखा गया है।जहां उनकी अच्छे से परिवरिस की जा रही है
4दिन से 18साल तक के बच्चे मिले-
शहर में 4 दिन के बच्चे से लेकर 18साल तक के किशोर चाइल्ड हेल्प लाइन को मिले।अभी हाल ही में एक साल का बच्चा बस स्टेंड पर रोता मिला, छह माह का बच्चा गोला का मंदिर और 4 दिन का बच्चा जेएएच में मिले थे।जिन्हें शहर में संचालित बाल शिशुग्रह में रखवा दिया गया जबकि छह साल से अधिक उम्र के 48 बच्चों को शैल्टर होम में रखा गया है।
परिजनों तक पहुंचाए बच्चे-
गरीब परिवार के बच्चों को उनके माता पिता तक पहुंचाने का काम किया गया । अभी हाल ही में पिछले एक साल से रह रहे 14 साल के बच्चे को सागर में रहने वाले पैरेंटस तक पहुंचाया। इसके साथ ही बच्चों को बिहार के दरभंगा, गया, खंगड़िया, बस्तर, बरेली में रह रहे परिजनों तक पहुंचाया।
फैक्ट फाइल-
शहर में मिले गुमशुदा व लावारिस बच्चे-
वर्ष बरामद घर वापसी शैल्टर होम
बेटे बेटियां
2016 116 39 148 07
2017 130 48 169 10
2018 99 39 124 12
रेलवे चाइल्ड हैल्प लाइन की शुरूआत 5 मई2018 को हुई-
2018 198 178 20
चाइल्ड हेल्प लाइन-
शहर में संचालित सेन्टर फोर इन्टीग्रेटेड डवलपमेंट चाइल्ड हेल्प लाइन लावारिस, गुमशुदा व परिजनों से बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाने का काम करती है।
यह टीम करती काम-
चाइल्ड लाइन में सेन्टर कॉर्डीनेटर राजेन्द्र सोनी, काउन्सलर तब्बसुम खान, टीम मेम्बर कमलेश पाल, ब्रजेश कुशवाह, युसुफ खान,शहरुख हुसैन, सोनू पुरिया, सुनीता मीना, और शहरुख खान है।इसी तरह से रेलवे चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम बनाई गई है।बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 1098 संपर्क किया जा सकता है।
वर्जन-
हमारी टीम को यदि कोई आवारा घूमते या पेपर बांटते बच्चा मिलता है तो उससे पूछताछ कर परिजनों से मिलाने का काम करती है। इसमें पुलिस की मदद ली जाती है, यदि पुलिस को कहीं पर बच्चा मिलता है तो उसे हम बाल कल्याण समिति की मदद से परिजनों तक पहुंचाने का काम करते हैं। जिनके परिजन नहीं मिलते उन्हें बाल शिशु ग्रह व शैल्टर होम में रखा जाता है जहां अच्छे से परिवरिस व पढ़ाई करवाई जाती है।
राजेन्द्र सोनी, सेन्टर डायरेक्टर , चाइल्ड हेल्प लाइन
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