ग्वालियर -मप्र उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के न्यायमूर्ति शील नागू ने हत्या के गंभीर मामले में पुलिस अधीक्षक भिंड को आदेश दिया है कि पुलिस थाना एंडोरी द्वारा हत्या के मामले को आत्महत्या में कैसे बदल दिया गया? जबकि मृतक के बेटे ने एफआईआर में स्पष्ट रूप से हत्या करना बताया था। उसके बाद भी पुलिस ने उसके बयान तक दर्ज नहीं किए। हाईकोर्ट ने एसपी भिंड से एक सप्ताह में शपथ पत्र सहित स्पष्टीकरण मांगा है। पुलिस की ओर से गोहद एसडीओपी उपेंद्र कुमार दीक्षित ने जवाब प्रस्तुत किया था।

एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया ने बताया कि शेरपुर निवासी शिवेंद्र सिंह चौहान ने हाईकोर्ट ग्वालियर में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि सात सितंबर 2018 को शाम करीब 4.30 बजे उसके पिता मचल सिंह का खेत से फोन आया था कि उसके गांव के कालीचरण, बृजेंद्रसिंह, गजेंद्र सिंह, तन्नू सिंह और भूपेंद्र सिंह झगड़ा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि तुम्हीं ने हमारी भैंसों को जहर दिया है। पिताजी के फोन पर वह अपने भाई छोटू के साथ दौड़कर खेत पर पहुंचा तो देखा कि आरोपी गजेंद्र व भूपेंद्र उसके पिता के पैर पकड़े हुए हैं और आरोपी कालीचरण तथा तन्नू सिंह उसके पिता के गले में तौलिया का फंदा लगाए थे।
फावड़ा मारा: अन्य आरोपी बृजेंद्र सिंह ने उसके पिता (मचल सिंह) के सिर में फावड़ा मारा, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने सांठगांठ कर पुलिस थाना एंडोरी में पहुंच गए और जब अस्पताल में डॉक्टर पोस्ट मार्टम कर रहे थे तभी आरोपीगणों की डॉक्टरों से गुफ्तगू हो रही थी। परिणामस्वरूप डॉक्टरों ने आरोपियों से सांठगांठ कर उनके पिता के सिर में मारी गई चोट का पोस्ट मार्टम में उल्लेख ही नहीं किया।
थे खून के धब्बे: जबकि जिस वाहन से शव को अस्पताल ले जाया गया और अस्पताल के जिस स्ट्रेचर से पीएम हाउस तक ले जाया गया, दोनों पर काफी मात्रा में उनके सिर का खून था। इसके फोटो भी शिवेंद्र ने याचिका के साथ प्रस्तुत किए। इस मामले में जब हाईकोर्ट ने गोहद एसडीओपी दीक्षित ने अपने शपथ पत्र सहित शासन की ओर से जवाब देते हुए बताया कि मामला हत्या का नहीं है। बल्कि मृतक ने स्वयं फांसी लगाकर आत्महत्या की है।
हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों के विरुद्ध करें सख्त कार्रवाई: इस मामले में एडवोकेट भदौरिया का तर्क सुनने के पश्चात हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पोस्ट मार्टम करने वाले डॉक्टरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो मृतक को न्याय मिलना संभव नहीं है। न्यायालय ने उक्त तर्कों से सहमत होते हुए एसडीओपी गोहद उपेंद्र कुमार दीक्षित द्वारा प्रस्तुत जवाब को अपर्याप्त मानते हुए एसपी भिंड को आदेश दिया है कि वे एक सप्ताह में शपथ पत्र के साथ अपना स्पष्टीकरण न्यायालय में दाखिल करें।
एडवोकेट भदौरिया ने दिया तर्क डॉक्टर बना रहे फर्जी एमएलसी: इस मामले में एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि यह पीएम करने वाले डॉक्टरों के कदाचरण का गंभीर मामला है। ऐसे मामले न्याय व्यवस्था को चौपट करने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भिंड में फर्जी एमएलसी बनाने वाले डॉक्टरों की बाढ़ है। 15 दिसंबर को ही फर्जी एमएलसी बनाने के मामले में डॉ आरके अग्रवाल पर भिंड पुलिस ने एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं 20 दिसंबर को एक अन्य डॉ. आरके सिंह के विरुद्ध भी फर्जी एमएलसी बनाने की एफआईआर दर्ज कराई गई है। ऐसा ही मामला याचिकाकर्ता का है।
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