ग्वालियर-
मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि पर 22 दिसंबर को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अंश भगवान दत्तात्रेय एवं मां अन्नपूर्णा की जयंती मनाई जाएगी। इसके लिए शहर के दत्त मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान दत्तात्रेय का प्राकट्य पूर्णिमा तिथि पर प्रदोषकाल में हुआ था। इसी तिथि में माता अन्नपूर्णा की जयंती मनाई जाती है। माता अन्नपूर्णा की जयंती पर रसोई घर में चूल्हे आदि का पूजन करने से घर-परिवार में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और माता अन्नपूर्णा की हमेशा कृपा बनी रहती है। शास्त्रों के अनुसार एक बार धरती पर अन्न की कमी हो गई थी। पृथ्वी पर चारों ओर हाहाकार मच गया था। तब अन्न की समस्या के निराकरण के लिए भक्तों ने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की आराधना शुरू कर दी। मनुष्यों की पुकार पर त्रिदेव ने माता पार्वती से मनुष्य की समस्या दूर करने का आग्रह किया। तब माता पार्वती ने मां अन्नपूर्णा का रूप धारण कर सबकी समस्या का समाधान कर अन्न के भंडार भर दिए। इसके बाद मनुष्यों ने सभी देवों के साथ मां अन्नपूर्णा की पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी।
ईश्वर और गुरु रूप में पूजे जाते हैं भगवान दत्तात्रेय
भगवान दत्तात्रेय का ईश्वर और गुरु के रूप में पूजन किया जाता है। दत्तात्रेय के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। श्रीमद् भागवत कथा के अनुसार भगवान दत्तात्रेय ने चौबीस गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी। उनके गुरुओं में जानवर तक शामिल हैं। उन्होंने जानवरों को गुरु बनाकर संदेश दिया है कि ज्ञान कहीं से भी प्राप्त हो, उसे ग्रहण करना चाहिए। भगवान दत्तात्रेय की जयंती पर नारद पुराण में रचित दिव्य स्तोत्र का पाठ करने से पितृदोष दूर होता है।
ऐसे करें मां अन्नपूर्णा की पूजा
इस दिन रसोई घर की साफ-सफाई के बाद गंगाजल छिड़कना चाहिए। चूल्हे का हल्दी, कुमकुम, चावल, पुष्प, धूप, दीपक जलाकर पूजन करना चाहिए। इसके बाद भोजन बनाकर भगवान-शिव और माता पार्वती को भोग लगाना चाहिए और फिर गरीबों को भोजन कराना चाहिए। अंत में खुद भोजन ग्रहण करना चाहिए। सूर्योदय से पूर्व एवं सूर्योदय के बाद माता अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ 40 दिन तक नियमित करने से घर में अन्न व धन का अभाव नहीं रहता है।
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