ग्वालियर
कलेक्टर अनुराग चौधरी शनिवार को पौधरोपण को लेकर नगर निगम, एसडीएम की तैयारियां देखने निकले। कलेक्टर जब बिरला नगर पहुंचे तो निगम के पार्क अधिकारी मुकेश बंसल ने कहा कि यहां करीब डेढ़ सौ पौधे लगाए जा सकते हैं, इस पर कलेक्टर ने कहा कि हवा में बातें मत करो, आप मुझे यह बताओ की 1 लाख पौधे कहां लगाओगे। आप लोगों की तैयारी अधूरी है, ऐसे स्थान चिन्हित करें जहां पर 8-10 हजार पौधे लगाए जा सकें। इतना ही नहीं वहां पर नंबरिंग भी की जाएगी, मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी एक अधिकारी को सौंपी जाएगी।
कलेक्टर अनुराग चौधरी पौधारोपण की तैयारियों को लेकर खासे नाराज दिखाई दिए। विभागीय अधिकारियों ने वन विभाग की जमीन, कुछ पहाड़ियां, बिरला नगर में भी स्थान दिखाए, लेकिन कोई भी जगह ऐसी नहीं थी जहां 8-10 हजार पौधे एक साथ लगाए जा सकें। इसको लेकर कलेक्टर ने कहा कि मुझे फर्जी आंकड़े नहीं चाहिए, मुझे यह बताएं कि आपके पास बल्क में पौधे लगाने के लिए स्थान कहां है। आपकी कोई तैयारी ही नहीं है। पूरी तरह हवा में बातें कर रहे हैं। एसडीएम और पार्क अधिकारी क्षेत्र में घूमकर उचित स्थान तय करें, जहां अधिक संख्या में पौधे लगाए जाने की गुंजाइश होना चाहिए। 12 जून को बैठक में इसका पूरा प्रेजेन्टेशन होगा, अपनी तैयारी के साथ पहुंचें। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, एडीएम संदीप केरकेट्टा, स्मार्ट सिटी सीईओ महिप तेजस्वी, अपर आयुक्त नरोत्तम भार्गव आदि मौजूद थे। स्मार्ट सिटी सीईओ को भी निर्देश दिए कि वह स्मार्ट सिटी क्षेत्र में पौधरोपण का काम शुरू कराएं। इसके लिए स्थान चिन्हित करके प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
आपके आरआई पटवारी क्या कर रहे हैं: कलेक्टर निरीक्षण के दौरान बिरला नगर लाइन नंबर एक पर पहुंचे तो यहां सड़क पर रेत गिट्टी पड़ी दिखाई दी। इस पर एसडीएम को फटकार लगाते हुए कहा कि आपके आरआई पटवारी क्या निरीक्षण कर रहे हैं। उनको यह सब दिखाई नहीं देता। इसके बाद तत्काल रेत गिट्टी को जब्त करा दिया गया।
पुरानी बावड़ी का होगा जीर्णोद्धारः बिरला नगर लाइन नंबर एक में हनुमान मंदिर के पास बनी पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी का भी कलेक्टर ने निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों से कहा कि आपने मुझे इस बावड़ी के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी। अधिकारियों को बावड़ी की साफ सफाई एवं जीर्णोद्धार का कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। यहां स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर को बताया कि इस बावड़ी के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को कुछ समय पहले तक पानी वितरण भी होता था। वर्तमान में बावड़ी सूख चुकी है।
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